कबड्डी की उत्पत्ति और भारत में इसका विस्तार
कबड्डी की जड़ें तमिलनाडु, महाराष्ट्र और पंजाब के ग्रामीण अखाड़ों में मिलती हैं, जहाँ यह खेल हज़ारों साल पहले शारीरिक दक्षता और सामूहिक रणनीति परखने के लिए खेला जाता था। अलग-अलग राज्यों में इसे हु-तु-तू, चेडुगुडु और कबड्डी जैसे नामों से जाना जाता रहा। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय दल ने प्रदर्शनी मैच खेला और 1950 में अखिल भारतीय कबड्डी महासंघ
की स्थापना के बाद इस खेल को संगठित ढाँचा मिला। इंदौर जैसे शहरों में कबड्डी के जिला स्तरीय आयोजनों ने खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचने का रास्ता दिया।